मित्र और मित्रता

जिससे हो एक अनोखा विशवास, जो रहे हमारे दिल के हमेशा आसपास,
मिले उससे एक भी दिवस, तो लगता है जैसे एक मास,
शख्स वो हमारा होता है जिसे कहते है मित्र ख़ास।

 

 

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