आत्मसम्मान(Self esteem)

सफलता हासिल हो जाती है, कुछ मेहनत और थोड़ी नालाकियो से, कौन शख्स इसका गुरूर दिखाता है,

कुर्सी पर तो हर इंसान बैठा है, पर कौन Chair-E-Post  का सुरूर दिखाता है|

हम भरोसा खुद पर करते है, चुगलबाज़ो पर नहीं,

हम व्यवहार दिल से निभाते है, आड़ लेते कागज़ो पर नहीं,

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मित्र और मित्रता

जिससे हो एक अनोखा विशवास, जो रहे हमारे दिल के हमेशा आसपास,
मिले उससे एक भी दिवस, तो लगता है जैसे एक मास,
शख्स वो हमारा होता है जिसे कहते है मित्र ख़ास।

 

 

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वक़्त

वक़्त, वक़्त की बात है, ये वक़्त बड़ा ही अनोखा है,
कभी तो है ये साथ तेरे, तो कभी ये देता धोखा है।
कहता है, ऐ खुदा के बन्दे, तू क्यों अकड़ दिखाता है,
जब जब छोड़े साथ ज़मीन का , चोट जिस्म पर खाता है।

 

 

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महावीर जयंती

धर्म ये इतना सरल नहीं है, ख़ुशी से बीते जीवन सारा, इसमें जीने का ये हल नहीं है,

मोह माया से बचके रहते, सांसारिक बंधन इसकी पहल नहीं है|

अलग अलग युगो में शिक्षा देने, भिन्न भिन्न संस्थापक आये थे,

अहिंसा और अपरिग्रह का ज्ञान दे गए, २४वे संस्थापक महावीर कहलाये थे|

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बैसाखी

बैसाखी का दिन निराला, स्थापना के साथ साथ, सिखों को दिया सिंह नाम है,

मुण्डे पर जचता पगड़ी और धोती कुरता, पटियाला सूट कुडियो की पहचान है|

भांगरे से ताल मिलाकर जब जब ढोल नगाड़ा बजता है,

एक जुट होता जन-समूह ये सारा, रंग बिरंगा हिंदुस्ता मेरा सजता है|

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स्वस्थ रहे मस्त रहे

दिन चर्या जो चल रही आज की, गौर न कोई फ़रमा रहा,

कोई हँसे अपने फैट पर, कोई पतले होने पर शरमा रहा|

कोई खुद को परफेक्ट समझ रहा, कोई gym  जाने को  गरमा रहा,

लेकिन एक अच्छी प्रक्रिया को, कोई न अपना रहा|

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वीर शहीद

शत शत नमन लिख लिया सबने Facebook और whatsapp पर,

पर क्या कोई सोच रहा, हालत परिवार की उस सैनिक के घर पर|

राजनेता सबसे आगे वैसे तो चढ़ कर आते है,

फिर क्यों न खुद के महल से, अपने पुत्रो को देश की रक्षा में लगाते है|

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नेताजी सुभाष चंद्र बॉस

आज़ादी का था जो दीवाना, सुभाष चंद्र जी नाम है,

आज इनकी जयंती पर, इन्हे शत-शत प्रणाम है|

सबकी कोशिशों को नाकाम किया था,

अंग्रेजो को सरेआम किया था,

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पुराना साल गया नहीं…..नया साल आ गया…….

पुराना साल गया नहीं…..नया साल आ गया…….

जो चला गया वो दे गया सपने,

जो चला गया वो दे गया यादें,

कैसे भूले दिन वो दुःख के, कैसे जिए दोबारा दिन वो सुख के,

जो चला गया वो दे गया हज़ारों बातें|

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अद्भुत

अद्भुत है ये बचपन, अद्भुत बचपन की पढाई है,
जब से हाथ में कलम उठाई, दुनिया समझ में आयी है।
मैं छोटा नन्हा सा बालक, कितना बोझ उठाता हु,
दादा दादी का हाथ पकड़, उन्हें बचपन की सैर करता हु।

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