मोहब्बत - राहत या आफत

मोहब्बत – राहत या आफत

मोहब्बत - राहत या आफत
मोहब्बत – राहत या आफत

मोहब्बत – राहत या आफत

ज़ज़्बातो से इकरार किया था like ,

also झुकी नज़रो से स्वीकार किया था,

कोई यन्त्र नहीं बना मापने के लिए so,

इसलिये इतना तुमसे प्यार किया था |

 

कहते है ग्रहण सभी को लगता है.

only चाहे सूरज हो या चाँद,

हम भी कैसे बच पाते,

है तो आखिर मामूली एक इंसान but |

गीली आँखों से उस अंधियारे को भी स्वीकार किया था,

दुनिया पागल कहती थी हमको, and उस हद तक तुमसे प्यार किया था |

Read More »

नहीं-वो-साल-भी-बुरा-नहीं-था corona

नहीं वो साल भी बुरा नहीं था

corona

हम सब ने नव वर्ष की फिर से खुशियां मनाई थी,

and ख़त्म हो गया २०२०, इक दूजे को दी बधाई थी,

सार्वजनिक वाक्य था, बुरा साल corona अब चला गया,

but पर क्यों ऐसा महसूस हो रहा है, also वो साल भी बुरा नहीं थ।

 

भागती ज़िन्दगी में एक विराम लगाया,

and चार पहर में से तीन पहर आराम दिलाया,

सुकून के जिन पलो की चाहत थी सपनो में,

जागती आँखों से उन्हें सच कर दिखाया,

because इसलिए महसूस हो रहा है, वो साल भी बुरा नहीं था।

नन्हे मासूमो को भारी बोझ  से बचा लिया,

also बुज़ुर्गो को घर में ही स्वर्ग दिखा दिया,

and बड़ो को चैन से मुखातिब करा दिया,

so इसलिए महसूस हो रहा है, वो साल भी बुरा नहीं था।

 

हम सब कोरोना को झेल रहे थे,

लेकिन फिर भी साथ में सब के खेल रहे थे,

खुशियों का माहौल बना था,

पकवानो का मेला लगा था,

अलग होकर भी सब एक लग रहे थे,

इसलिए महसूस हो रहा है, वो साल भी बुरा नहीं था।

 

सोचो प्रकृति खुश थी कितनी,

चोरी, डकैती भी बंद थी, अस्मत बहनो की बची हुई थी,

आतंक का नाम नहीं था, बुरे वक़्त में भी अपनों की एकता से जीती लड़ाई थी,

so इसलिए महसूस हो रहा है, वो साल भी बुरा नहीं था।

 

Dr. Sonal Sharma

खुद

मैं खुद में ज़िन्दा नहीं

देख तमाशा दुनिया का, खुद सुनके ताने अपनों के,

रोंध के खुद की खुशियों को, तोड़ के तारे सपनो के,

जी तो रही हूँ, पर शायद मैं खुद में ज़िन्दा नहीं।

 

 

सोच के सबके बारे में , मैंने खुद की मुस्कुराहट ही खोदी,

नहीं संभल रहे थे रिश्ते पुराने, नए की बुनियाद क्यों बोदी ?

पूँछ सवाल स्वयं से, मैं अपने में ही रो लेती हूँ,

जी तो रही हूँ, पर शायद मैं स्वं में ज़िन्दा नहीं।

 

आँखों से आँसू न छलक रहे, ना ही रही लब पर मुस्कान,

दिल में दर्द की गिनती इतनी, जितने फलक में नक्षत्र (गिनती) समान,

टूटे शब्दों की माला,मैं स्वरुप में ही पिरो लेती हूँ,

जी तो रही हूँ, पर शायद मैं स्वं में ज़िन्दा नहीं।

 

आत्म-सम्मान को मेरे, नाम दिया गया अभिवृत्ति,

विश्वास को अहंकार बता कर, क्षति कर दी मेरी मति,

बंधन – प्यार जैसे शब्दों से, आत्मा को आशा की गोली दे देती हूँ,

जी तो रही हूँ, पर शायद मैं स्वं में ज़िन्दा नहीं।

 

डॉ सोनल शर्मा

दर्द

दर्द

दर्द भी आज रोने लगा, जब दिल के दर्द को दर्द हुआ,

हम कष्ट में जी रहे थे ज़िंदगी हमारी, पर अब कष्ट भी बेदर्द हुआ।

हंसी के परदे लगा दिए लबों पर, की आह कही निकल ना जाये,

रोशनी के परदे लगा दिए आँखों पर, की आंसू कही छलक ना जाये,

Read More »

मित्र और मित्रता

मित्र और मित्रता

जिससे हो एक अनोखा विशवास, also जो रहे हमारे दिल के हमेशा आसपास,
मिले उससे एक भी दिवस, so too तो लगता है जैसे एक मास,
शख्स वो हमारा होता है जिसे कहते है मित्र ख़ास।

 

 

Read More »

दिल का हाल

दिल का आशियाना भी बहुत ही कमाल है,
कुछ अपने है, कुछ बैगाने है, और सपनो का भी इसमें धमाल है,
इश्क़ किया तो पछता गए, किया तो ललचाते रहे,
वक़्त का नहीं, दिल का हाल बेहाल है।

 

 

Read More »

रिश्ता क्या कहलाता है

खुदा भी गजब करता है,,, जिन्दगी में नए रंग भरता है,,,,

समझ नहीं पाते हम आखिर यह रिश्ता क्या कहलाता है,,,

प्यार है,,,,इकरार है,,,,,समझ कर भी हर बात में नासमझी है,,,,

ठहर जाते है चलते चलते हम,, पर समझ नहीं पाए की यह रिश्ता क्या कहलाता है !!!!!!

Read More »

वीर शहीद

शत शत नमन लिख लिया सबने Facebook और whatsapp पर,

पर क्या कोई सोच रहा, हालत परिवार की उस सैनिक के घर पर|

राजनेता सबसे आगे वैसे तो चढ़ कर आते है,

फिर क्यों न खुद के महल से, अपने पुत्रो को देश की रक्षा में लगाते है|

Read More »

पुराना साल गया नहीं…..नया साल आ गया…….

पुराना साल गया नहीं…..नया साल आ गया…….

जो चला गया वो दे गया सपने,

जो चला गया वो दे गया यादें,

कैसे भूले दिन वो दुःख के, कैसे जिए दोबारा दिन वो सुख के,

जो चला गया वो दे गया हज़ारों बातें|

Read More »