रिश्ता क्या कहलाता है

खुदा भी गजब करता है,,, जिन्दगी में नए रंग भरता है,,,,

समझ नहीं पाते हम आखिर यह रिश्ता क्या कहलाता है,,,

प्यार है,,,,इकरार है,,,,,समझ कर भी हर बात में नासमझी है,,,,

ठहर जाते है चलते चलते हम,, पर समझ नहीं पाए की यह रिश्ता क्या कहलाता है !!!!!!

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वक़्त

वक़्त, वक़्त की बात है, ये वक़्त बड़ा ही अनोखा है,
कभी तो है ये साथ तेरे, तो कभी ये देता धोखा है।
कहता है, ऐ खुदा के बन्दे, तू क्यों अकड़ दिखाता है,
जब जब छोड़े साथ ज़मीन का , चोट जिस्म पर खाता है।

 

 

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