चुनाव


 चुनाव चुनाव सब करे, मतलब समझे ना कोई,

सरकार किसी की भी बने, घाटा तो जनता को होइ |

वादे करके उन्नति के, जनता को उल्लू पटाते है,

चाँद की बाते करते रहते, बादल तक छू ना पाते है,

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नारी व्यथा

प्रेम तुम्ही  से  किया  है  हमने , तुम संग प्रीत लगाई है,

पर क्या हश्र होता जीवन का, तुमने ये सीख सिखलाई है|

माटी का पुतला बन कर रही तो मैं एक प्यारी नारी थी,

माँगा थोड़ा स्नेह जो तुमसे, तो मैं पढ़ी लिखी गंवार नारी थी|

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अद्भुत

अद्भुत है ये बचपन, अद्भुत बचपन की पढाई है,
जब से हाथ में कलम उठाई, दुनिया समझ में आयी है।
मैं छोटा नन्हा सा बालक, कितना बोझ उठाता हु,
दादा दादी का हाथ पकड़, उन्हें बचपन की सैर करता हु।

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