पंछी

कहते है पंछी हर ईमारत पर बैठता है,

  कोई नहीं समझता वो किस अशून्य में देखता है,

कभी गौर फरमाइएगा हुज़ूर ,

  वो ईमारत के अंदर की कहानी अमुक शब्दों में बोलता है।

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