वक़्त

वक़्त, वक़्त की बात है, ये वक़्त बड़ा ही अनोखा है,
कभी तो है ये साथ तेरे, तो कभी ये देता धोखा है।
कहता है, ऐ खुदा के बन्दे, तू क्यों अकड़ दिखाता है,
जब जब छोड़े साथ ज़मीन का , चोट जिस्म पर खाता है।

 

 

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