नारी व्यथा

प्रेम तुम्ही  से  किया  है  हमने , तुम संग प्रीत लगाई है,

पर क्या हश्र होता जीवन का, तुमने ये सीख सिखलाई है|

माटी का पुतला बन कर रही तो मैं एक प्यारी नारी थी,

माँगा थोड़ा स्नेह जो तुमसे, तो मैं पढ़ी लिखी गंवार नारी थी|

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