मन

आज मन इतना क्यों अशांत हो रहा,

क्या है वो विचार जो इसमें बह रहा ,

शुन्य हल वाली समीकरण है शायद,

जिसके संयोग में अनगिनत संचार हो रहा । 

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अद्भुत

अद्भुत है ये बचपन, अद्भुत बचपन की पढाई है,
जब से हाथ में कलम उठाई, दुनिया समझ में आयी है।
मैं छोटा नन्हा सा बालक, कितना बोझ उठाता हु,
दादा दादी का हाथ पकड़, उन्हें बचपन की सैर करता हु।

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