महावीर जयंती

धर्म ये इतना सरल नहीं है, ख़ुशी से बीते जीवन सारा, इसमें जीने का ये हल नहीं है,

मोह माया से बचके रहते, सांसारिक बंधन इसकी पहल नहीं है|

अलग अलग युगो में शिक्षा देने, भिन्न भिन्न संस्थापक आये थे,

अहिंसा और अपरिग्रह का ज्ञान दे गए, २४वे संस्थापक महावीर कहलाये थे|

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बैसाखी

बैसाखी का दिन निराला, स्थापना के साथ साथ, सिखों को दिया सिंह नाम है,

मुण्डे पर जचता पगड़ी और धोती कुरता, पटियाला सूट कुडियो की पहचान है|

भांगरे से ताल मिलाकर जब जब ढोल नगाड़ा बजता है,

एक जुट होता जन-समूह ये सारा, रंग बिरंगा हिंदुस्ता मेरा सजता है|

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नवरात्री

साल में आते चार नवरात्री, किसको दे दू प्रथम स्थान,

चारो ही किसी न किसी रूप में, कर रहे जान-मानव कल्याण|

दो तो आये गुप्त रूप से, आषाढ़ और माध के महीने में,

चैत्र और आश्विन को हम पूजे, जैसे सजती अंगूठी हीरे के नगीने में|

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त्रिकालदर्शी शिव

shivratriशिव रात्रि के इस पर्व पर हम शिव के भक्त तो बन जाते है,

पर जितना त्याग किया शिव ने,

उसका थोड़ा ऋण भी चूकाते है|

विष का प्याला पी गए वो,

जन जन को माहुर से बचाने को,

पर हर ज़ीवा हलाहल उगल रही,

खुद की शैली दिखाने को|

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